वरुण के बहाने मोदी नाम को बचाना चाहती है भाजपा

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आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर यूपी की 80 लोकसभा सीट किसी भी सियासी दल के लिए काफी महत्वपूर्ण है और यही वो कारण है कि सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी से लेकर भाजपा,कांग्रेस और बसपा सभी दल यूपी में अपनी ताकत झोखे हुए है। अपनी चुनावी रणनीती को और मजबूती देने के लिए ही भाजपा ने अपने युवा फायर ब्रांड नेता वरुण गाँधी को राष्ट्रीय महासचिव के पद पर बैठाया है।

भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने वरुण गांधी के जरिए एक तीर से दो निशानें लगाने की कोशिश की है। राजनीती में कई बार तो तीसरा निशाना फोकट में भी लग जाता है। सो, वरुण गांधी को लाकर बीजेपी ने यह संदेश तो दिया है कि वह यूपी को ज्यादा अहमियत देने जा रही हैं। साथ ही, यह भी बताने की कोशिश की है कि बीजेपी अब युवा चेहरों को आगे बढ़ा रही है। यही कारण है कि वरुण गाँधी लगातार यूपी में चुनावी रैली कर रहे हैं।

दरअसल वरुण को आगे करके भाजपा ने यूपी में लोकसभा चुनावो को राहुल बनाम वरुण गांधी करने की तैयारी की है, क्योकि भाजपा अच्छी तरीके से जानती है कि यूपी में कांग्रेस के लिए एक मात्र युवा चेहरा राहुल गाँधी है जिनके ऊपर यूपी में कांग्रेस को जिताने का पूरा दारोमदार है। ऐसे में यदि वरुण को चुनाव में एक युवा चेहरा बनाकर पेश किया जाये तो राहुल की काट निकालना आसान होगा। इतना ही नहीं वरुण गाँधी के रूप में भाजपा दो तरीके के वोट बैंक पर भी निशाना साधने की कोशिश कर रही है। पहला भाजपा वरुण गाँधी के माध्यम से गाँधी खानदान के परम्परागत वोट बैंक को भी अपने पाले में करने की फ़िराक में है। दूसरा ये कि  वरुण की पहचान कट्टरहिंदूवादी नेता के रूप में है इसलिए एक वर्ग विशेष का वोट बैंक भी भाजपा अपने पाले में कर ले जायेगी।

हलांकि यह भी सही है कि वरुण को आगे करके भाजपा मीडिया द्वारा आगामी लोकसभा चुनाव के लिए बनाये गए मोदी बनाम राहुल के चक्र को तोड़ना चाहती है। भाजपा किसी कीमत पर नहीं चाहती है कि लोकसभा चुनाव मोदी बनाम राहुल हो। इसलिए लगातार ऐसी परिस्थिति बनायीं जा रही है कि पूरे भारत में नहीं तो कम से कम उतर प्रदेश में तो लोकसभा चुनाव राहुल बनाम वरुण हो ताकि यदि चुनाव बाद पार्टी को हार का सामना करना पड़े तो मोदी की सर पर हार का ठीकरा कम से कम फूटे

अनुराग मिश्र

स्वतंत्र पत्रकार

लखनऊ

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