संघर्ष (कविता)

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…….सुशीला के सी आस्था,

आओ अंधेरे दूर करें लिए मशालें थाम
गर मंजिल पाना है सपने गढ़े महान

नये संघर्ष, क्यों भरोसा किसी का
याकि करो खुद पर खुद बनो अपनी पहचान

आओ अंधेरे दूर करें लिए मशालें थाम
गर मंजिल पाना है सपने गढ़े महान

बहुत बहा लिए आँसू तुमने अब तुम संघर्ष करो
तुम भी जागो हम भी और बदले ये जहान

आओ अंधेरे दूर करें लिए मशालें थाम
गर मंजिल पाना है सपने गढ़े महान

परिवर्तनों के खातिर आओ करे नये विचार
नयी सोच नयी उम्मीदें नया हो हर इन्सान

आओ अंधेरे दूर करें लिए मशालें थाम
गर मंजिल पाना है सपने गढ़े महान

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