सरबजीत को निपटाने की साजिश

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लाहौर की कोट लखपत जेल में सरबजीत पर हुए कातिलाना हमले से किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। सरबजीत पर इस तरह के हमले की आशंका लगातार व्यक्त की जा रही थी। उसके परिवार वाले बार-बार इस बात को दुहरा रहे थे कि जेल में सरबजीत की हत्या की साजिश रची जा रही है। इसके बावजूद सरबजीत की सुरक्षा को लेकर खास इंतजामात नहीं किए गये। जिस तरह से जेल के अंदर छह कैदियों के एक समूह ने सरबजीत पर ईंटों, ब्लेडों और प्लेटों से हमला किया है, उससे यह स्पष्ट हो जाता है कि यह हमला पूर्व नियोजित थी। कैदियों की मंशा सरबजीत को मौत के घाट उतारने की थी। हालांकि जेल प्रशासन की ओर से यही कहा जा रहा है कि उस पर हमला करने में सिर्फ दो कैदी ही शामिल थे, लेकिन पाकिस्तानी मीडिया दबी जुबान से इस हमले में छह कैदियों के शरीक होने की तस्दीक कर रही है। फिलहाल सरबजीत लाहौर के जिन्ना अस्पताल में जीवन और मौत के बीच झूल रहा है। उसके  सिर में गंभीर चोटें आई हैं। सवाल उठता है कि जब सरबजीत पर हमले की आशंका पहले ही व्यक्त की जा चुकी थी, फिर उसे खूंखार कैदियों के बीच क्यों छोड़ा गया?
भारत में कसाब और अफजल गुरु को फांसी के बाद से ही पाकिस्तान में सरबजीत को फांसी देने की मांग जोर-शोर से उठ रही थी। पूरा पाकिस्तान इन दोनों की फांसी से बौखलाया हुआ था। सरबजीत को जल्द से जल्द फांसी पर चढ़ाने की मंशा तकनीकी कारणों व अंतराष्टÑीय दबाव की वजह पूरी नहीं हो पा रही थी। पाकिस्तानी हुकूमत भी सरबजीत को तत्काल फांसी पर लटका कर अंतरराष्टÑीय स्तर पर यह संदेश नहीं देना चाहती थी कि वह प्रतिशोध की भावना से भरी हुई है। शायद यही वजह है कि सरबजीत को निपटाने के लिए पूरी तरह से अवैध तौर-तरीकों का इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई। कहा जा रहा है कि सरबजीत को मौत के घाट उतारने की साजिश आईएसआई ने रची थी। इसके लिए विधिवत हत्या के मामले में सजा  काट रहे खूंखार कैदियों से संपर्क किया गया और उन्हें सरबजीत को ठिकाना लगाने के लिए तैयार किया गया। जेल के अंदर हथियार के रूप में इन्हें ब्लेड मुहैया कराए गये। हालांकि आधिकारिक तौर पर पाकिस्तान इसे एक दुर्घटना ही मान रहा है, जो कहीं भी किसी भी जेल में हो सकती है।  अफजल गुरु को फांसी के बाद सरबजीत सिंह की बहन भारत से सरकार से लगातार गुहार लगा रही थी कि पाकिस्तान की जेल में सरबजीत सिंह की जान को खतरा है। घटना के दो दिन पहले भी उसने भारत सरकार को जेल के अंदर सरबजीत पर हमले को लेकर आगाह किया था। इंटेलिजेंस ब्यूरो और रॉ की रिपोर्ट के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान सरकार से इस संबंध मेंं बात भी की थी, फिर वहां की सरकार हरकत में नहीं आई। पाकिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता अंसार बर्नी ने भी इस बात की आशंका जताई थी कि जेल में सरबजीत की हत्या की साजिश की जा रही है।
सरबजीत की कहानी सीमावर्ती इलाके में रहने वाले एक आम किसान की कहानी है। पंजाब के तरनतारन जिले के सीमावर्ती गांव भिखीविंड के रहने वाले सरबजीत को 28 अगस्त, 1990 को पाकिस्तान बार्डर गॉर्ड ने उस वक्त गिरफ्तार कर लिया था, जब वह शराब के नशे में गलती से सीमा पार कर गया था। उसकी पत्नी सुखप्रीत कौर का कहना है कि 28 अगस्त, 1990 को सरबजीत बाघा बार्डर के करीब अपने खेतों की जुताई करने के लिए घर से निकला था। उसके बाद वह कभी लौट कर वापस नहीं आया। उन लोगों ने उसकी काफी तलाश की, लेकिन नौ महीने तक कोई सुराग नहीं मिला। बाद में उन्हें एक पत्र प्राप्त हुआ, जिससे जानकारी मिली कि सरबजीत को शराब के नशे में पाकिस्तानी बॉर्डर फोर्स ने गिरफ्तार कर लिया था। उस पर गलत तरीके सीमा पार करने का आरोप लगाया गया था। आठ दिन बाद पाकिस्तानी पुलिस ने उस पर 1990 में फैसलाबाद और लाहौर में श्रृंखलाबद्ध बम धमाकों के आरोप लगा दिए, जिसमें 14 लोगों की मौत हो गई थी। आरोप में कहा गया कि उसे इन बम धमाकों के बाद वापस भारत लौटते वक्त गिरफ्तार किया गया था। उस पर भारतीय खुफिया एजेंसियों के लिए काम करने का आरोप लगाते हुये उसे आतंकी घोषित कर दिया गया। 1991 में पाकिस्तानी आर्मी एक्ट के तहत उसे आतंकी करार देते हुये फांसी की सजा सुनाई गई। तब से सरबजीत पाकिस्तान की जेल में बंद था। पाकिस्तान के हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकीअपील को खारिज कर दिया था। यहां तक कि तीन मार्च, 2008 को पाकिस्तान के तत्कालीन राष्टÑपति परवेज मुशर्रफ ने भी उसकी दया याचिका को नामंजूर कर दिया था। बाद में देश-विदेश के कई मानवाधिकारवादी कार्यकर्ताओं ने सरबजीत के मसले को जोर शोर से उठाया, जिसकी वजह से उसकी फांसी की सजा रुकी हुई थी। सलमान खान और रजा मुराद जैसी फिल्मी हस्तियों ने भी सरबजीत की रिहाई के लिए मुहिम चलाई थी।
इस सब के बावजूद पाकिस्तान में एक तबका सरबजीत को फांसी पर चढ़ाने के लिए लगातार सक्रिय रहा। दिसंबर 2012 में लाहौर प्रेस क्लब के सामने सरबजीत को फांसी पर चढ़ाने के लिए इस तबके ने जोरदार प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान भारत के झंडे भी जलाए गये थे। कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि सरबजीत को लेकर पाकिस्तान के लोग काफी उग्र रूप अख्तियार किये हुये थे। कसाब और अफजल गुरु की फांसी के बाद तो वे लोग किसी भी कीमत पर सरबजीत को बख्शने के मूड में नहीं हैं। आखिरकार सरबजीत के ऊपर जेल के अंदर कातिलाना हमला हो ही गया। इस हमले के विरोध में भारत के मुखतलफ शहरों में जबरदस्त प्रदर्शनों का दौर शुरू चुका है। इसके लिए सीधे तौर पर पाकिस्तानी हुकूमत को जिम्मेदार समझा जा रहा है। तमाम तरह की आलोचनाओं से बचने के लिए पाकिस्तानी हुकूमत ने जेल में हुए इस हमले की जांच के लिए एक टीम का गठन कर दिया है। इसके बावजूद पाकिस्तानी हुकूमत पर सवालिया निशान लगा हुआ है। इस वक्त भारत में सभी लोग सरबजीत के बचने की दुआ कर रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान में कट्टरपंथियों के बीच जश्न का माहौल है। फिलहाल सरबजीत को देखने के लिए उसके परिवार के चार सदस्य पाकिस्तान जा चुके हैं। कड़ी सुरक्षा के वावजूद हो सकता है कि इन लोगों को विरोध का सामना करना पड़े।
सरबजीत यदि अभी मौत को मात देकर बच भी जाता है तो पाकिस्तान की जेल से उसके रिहा होने की संभावना कम ही है, क्योंकि पाकिस्तान में लोग उसे मौत के घाट उतारने की जिद पर अड़े हुए हैं। यदि खुदा न खास्ते सरबजीत की मौत हो जाती है तो फिर भारत के लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर होगा। कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि आने वाले दिनों में भारत और पाकिस्तान के आपसी संबंधों में और भी अधिक तल्खी आने की पूरी संभावना है। वैसे भी पिछले कुछ अरसे दोनों देशों के संबंध लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। लाहौर जेल में सरबजीत पर कातिलाना हमला की घटना ने दोनों देशों को एक दूसरे के प्रति और आक्रामक बना दिया है।

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