नव वर्ष के वास्ते कामना

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– धर्मवीर कुमार, बरौनी , बेगुसराय

नव वर्ष के वास्ते, है मेरी यह कामना. 
जो जहाँ हैं, खुश रहें, दुखों से हो न सामना.

नए साल में, नयी सोच, उत्साह नया, नयी चाह हो.
जोश नया, संकल्प नया, अवसर नए, नयी राह हो.

पुरानी खट्टी -मीठी यादें, आओ अब बिसार दें.
अद्यतन विकास को, और नया विस्तार दें.

सब लोग ईमानदार हों, है पुरानी कामना. 
पर खुद के भी ईमान पर, होगा हमें अब सोचना.

हो अँधेरी रात से, जब हमारा सामना.
हाथ में मशाल हो, व्यर्थ तिमिर को कोसना.

है जरुरी इस जगत में, औरों को भी जानना.
किन्तु अधिक जरुरी है, स्वयं को पहचानना.

नव वर्ष के वास्ते, है मेरी यह कामना. 
जो जहाँ हैं, खुश रहें, दुखों से हो न सामना

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।

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