अंदाजे बयां
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मैं ‘आप’ को पसंद क्यों करता हूँ: मटुकनाथ
< ![endif]–> बहुत दिनों के बाद फेसबुक पर बैठा, तो मित्रों ने प्रश्नों की झड़ी लगा दी कि आपने ‘आप’…
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वह आज भी जागता है. . . !
……………………………………..उस जुलाहे के शब्द अब भी समय को कात रहे हैं। उसकी आवाज़ में न जाने कितने दिमागों को रोशन…
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ये जगह नहीं है मेरे काम की …….!
इंजीनियर, डॉक्टर, वैज्ञानिक, प्रबंधक, बैंकिंग या फिर शिक्षक बनना हमेशा से ही युवाओं का टशन रहा है। कोई समाजसेवक बन…
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मॉल यानि आधुनिकता का नवीनतम लबादा पहना हुआ मेला
मनोज लिमये, पश्चिमी आँधी ऐसी चली कि गाँव में लगने वाले स्वदेशी हाट धीरे-धीरे मेलों में बदले और अब देखते…
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‘अगले जनम मुझे बाबू ही कीजो‘
मनोज लिमये, वर्तमान समय में बाबुओं के घर से हड़प्पा-मोहन जोदडो की तर्ज पर लगातार मिल रही चल-अचल संपत्ति मेरे…
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पारंपरिक गीतों से दूर हो रही होली…!
“धन्य-धन्य भाग तोहर हउ रे नउनियां….मड़वा में राम जी के छू अले चरणियां…” ढोल मंजीरे की थाप पर होली गीतों…
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सूरज प्रकाश: अपनी बात (पार्ट – 1)
बहुत सारे बिम्ब हैं। स्मृतियां हैं। दंश हैं। बहुत सारी खुशियां हैं। बहुत कुछ ऐसा है जो अब तक किसी…
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बलात्कार क्यों… कौन… और किसलिए ?
अरविन्द कुमार पप्पू // यूं तो मेरा इस विषय पर विचार, शोध और जानकारी निश्चित रूप से विवादित, हास्यास्पद एवं…
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अनमोल होते हैं भाई-बहन के रिश्ते
वीरेन्द्र कुमार// कुछ रिश्ते विरासत में मिलते हैं जो जन्म से निर्रधारित होते हैं, कुछ रिश्ते बनाये जाते हैं पर…
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